ओडिशा में हर पांच में से एक महिला घरेलू हिंसा का शिकार, हर चार में से एक बच्चा कुपोषित

• चौंकाने वाला खुलासा: ओडिशा में 18-49 आयु वर्ग की 20% से अधिक महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार। • आधिकारिक बयान: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के NFHS-6 सर्वे में सामने आए चिंताजनक आंकड़े। • मौके की स्थिति: ग्रामीण इलाकों में हिंसा का प्रतिशत अधिक, महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता में गिरावट। • लंबित जांच: बाल कुपोषण, मातृ स्वास्थ्य और बढ़ते सी-सेक्शन डिलीवरी पर विशेष ध्यान। : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के अनुसार, ओडिशा में हर पांच में से एक महिला (18-49 वर्ष) अपने साथी से घरेलू हिंसा का अनुभव करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 19.6% है, जो शहरी क्षेत्रों (15.2%) से अधिक है। सर्वेक्षण में महिलाओं की घरेलू निर्णय लेने की क्षमता में गिरावट भी देखी गई है। बच्चों में कुपोषण और मातृ स्वास्थ्य चिंता का विषय है, जबकि सी-सेक्शन डिलीवरी में 8% की वृद्धि हुई है।
• ओडिशा में महिलाओं की असुरक्षा का भयावह सच: NFHS-6 रिपोर्ट ने घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर प्रकाश डाला। • बाल कुपोषण की गंभीर समस्या: हर चार में से एक बच्चा शारीरिक रूप से अविकसित, दीर्घकालिक कुपोषण का संकेत। • मातृ स्वास्थ्य में सुधार की धीमी गति: आयरन फोलिक एसिड सेवन में कमी और सी-सेक्शन डिलीवरी में चिंताजनक वृद्धि। • स्वास्थ्य संबंधी अन्य चुनौतियाँ: मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मामलों में वृद्धि, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में। : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों ने ओडिशा में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कई गंभीर चिंताएं उजागर की हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य में घरेलू हिंसा का स्तर अत्यंत चिंताजनक है। 18 से 49 वर्ष की आयु की लगभग 20% से अधिक महिलाएं अपने पतियों द्वारा किसी न किसी प्रकार की हिंसा का शिकार हुई हैं। यह दर ग्रामीण इलाकों में 19.6% है, जो शहरी क्षेत्रों की 15.2% की तुलना में काफी अधिक है। सर्वेक्षण के निष्कर्ष यह भी दर्शाते हैं कि ओडिशा में महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी राष्ट्रीय औसत से पीछे है। जहां राष्ट्रीय स्तर पर 89% महिलाएं घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल हैं, वहीं ओडिशा में यह आंकड़ा 87.2% है। यह गिरावट महिलाओं की स्वायत्तता और सशक्तिकरण पर सवाल खड़े करती है। NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों की तुलना में, महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता में कमी आई है, जो एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष में केवल 26% महिलाओं को उनके श्रम के बदले नकद भुगतान प्राप्त हुआ, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। बच्चों के स्वास्थ्य के मोर्चे पर, स्थिति और भी गंभीर है। ओडिशा में 12-23 महीने के 4% बच्चे ऐसे हैं जिन्हें कोई टीका नहीं लगा है, जिससे वे विभिन्न बीमारियों के प्रति संवेदनशील हैं। लगभग 8% बच्चे अभी भी पोलियो वैक्सीन से वंचित हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि राज्य में 26.8% बच्चे (5 वर्ष से कम) शारीरिक रूप से अविकसित (stunted) हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का परिणाम है। 22.1% बच्चे कम वजन (wasted) के शिकार हैं, जो हालिया या गंभीर कुपोषण को दर्शाता है। मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में, संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 94% तक पहुंच गया है, जो पिछले सर्वेक्षण से बेहतर है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं द्वारा आयरन फोलिक एसिड का सेवन अभी भी संतोषजनक नहीं है। केवल 74.5% महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान 100 दिनों तक इसका सेवन किया, जबकि केरल जैसे राज्यों में यह आंकड़ा 92% तक है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, आयरन की कमी से एनीमिया होता है, जो समय से पहले जन्म और भ्रूण के विकास में बाधा जैसी जटिलताओं से जुड़ा है। सी-सेक्शन डिलीवरी में 8% की भारी वृद्धि देखी गई है, जो अब कुल जन्मों का 29.4% है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 46.4% है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह लगभग 27% है। निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन का प्रचलन 76.8% है, जो चिकित्सा हस्तक्षेप पर अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सी-सेक्शन की आदर्श दर 10-15% के बीच होनी चाहिए, क्योंकि इससे अधिक दर मातृ और शिशु मृत्यु दर में सुधार का कोई प्रमाण नहीं देती है। इसके अलावा, ओडिशा में मोटापे की दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महिलाओं में 29.7% और पुरुषों में 27.8% मोटापे के मामले दर्ज किए गए हैं, जो NFHS-5 की तुलना में काफी अधिक है। यह प्रवृत्ति शहरी क्षेत्रों में अधिक स्पष्ट है, जहां लगभग आधे लोग मोटापे से ग्रस्त हैं। उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है, जिसमें पुरुषों में महिलाओं की तुलना में थोड़ी अधिक दर दर्ज की गई है।




