म्यांमार सीमा पर सक्रिय समूहों का भारत पर असर, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति से की शरणार्थी समस्या पर चर्चा

• म्यांमार से लगती भारतीय सीमा पर सक्रिय समूहों की गतिविधियों का असर • पीएम मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति से शरणार्थी समस्या पर की बात • सीमावर्ती इलाकों में तनाव और लोगों की सुरक्षा पर चिंता • शरणार्थियों की वापसी के लिए दोनों देशों में तंत्र सक्रिय ने म्यांमार के राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने म्यांमार के राष्ट्रपति से शरणार्थी समस्या पर भी चर्चा की, जो मिजोरम में शरणार्थियों के आगमन के कारण जटिल हो गई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, पीएम मोदी ने म्यांमार से आग्रह किया कि सीमा पार से होने वाली कार्रवाई भारतीय नागरिकों को प्रभावित न करे। दोनों देश शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी के लिए तंत्र पर काम कर रहे हैं।
• म्यांमार सीमा पर सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों से भारतीय सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता • प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति के साथ शरणार्थी संकट और सीमा सुरक्षा पर की विस्तृत चर्चा • मिजोरम में शरणार्थियों का बढ़ता प्रवाह, भारत सरकार ने की वापसी के लिए तंत्र पर जोर देने की अपील • म्यांमार सरकार ने स्वीकार किया कि सामान्य स्थिति बहाल होने पर लौटेंगे शरणार्थी, द्विपक्षीय सहयोग जारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में म्यांमार के राष्ट्रपति के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इन गतिविधियों का सीधा प्रभाव भारत की सीमा पर बसे नागरिकों पर पड़ रहा है, जिससे न केवल उनकी सुरक्षा को खतरा है बल्कि बड़ी संख्या में लोग शरणार्थी बनकर भारत की ओर पलायन कर रहे हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति से स्पष्ट रूप से आग्रह किया कि सीमा पार से की जाने वाली किसी भी सैन्य या सुरक्षा संबंधी कार्रवाई से भारतीय नागरिकों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। शरणार्थी समस्या, विशेष रूप से मिजोरम में म्यांमार से आए शरणार्थियों की बढ़ती संख्या, बैठक का एक प्रमुख एजेंडा रही। विदेश सचिव मिस्री ने स्वीकार किया कि म्यांमार के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में जारी सक्रिय शत्रुता के कारण बड़ी संख्या में लोग मिजोरम में शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं। उन्होंने इस स्थिति को एक जटिल मामला बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि शरणार्थियों की सुरक्षित और व्यवस्थित वापसी के लिए दोनों देशों के बीच एक स्थापित तंत्र और प्रक्रिया मौजूद है। प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति से इस तंत्र को और मजबूत करने और शरणार्थियों की वापसी की प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया। दोनों देशों के अधिकारी इस बात पर लगातार संपर्क में हैं कि शरणार्थियों को किस प्रकार सुरक्षित रूप से उनके देश वापस भेजा जा सके। म्यांमार सरकार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वे इन लोगों को स्थायी शरणार्थी नहीं मानते हैं और जैसे ही सीमा के दूसरी ओर सामान्य स्थिति बहाल होगी, ये सभी लोग अपने देश लौट जाएंगे। इस बैठक के माध्यम से, भारत ने म्यांमार के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व मानवीय मुद्दों को हल करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देश इस दिशा में मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शरणार्थी समस्या का स्थायी समाधान खोजना है।




