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National/State01 Jun 2026, 06:31 pm

म्यांमार से भारत को साइबर धोखाधड़ी का खतरा, सहयोग पर जोर

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म्यांमार से भारत को साइबर धोखाधड़ी का खतरा, सहयोग पर जोर

• साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते जाल का खुलासा • म्यांमार से भारतीय नागरिकों की वापसी • सीमावर्ती क्षेत्रों में सहयोग की आवश्यकता • द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने पर सहमति : भारत ने म्यांमार के साथ द्विपक्षीय वार्ता में साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों से संचालित होने वाले इन गिरोहों के कारण पिछले 18 महीनों में 2,411 भारतीय नागरिकों को वापस लाया गया है। उन्होंने कहा कि लगभग 150 भारतीय अभी भी ऐसे ठिकानों पर फंसे हैं, जिन्हें छुड़ाने के प्रयास जारी हैं। यह मुद्दा क्षेत्रीय सहयोग की महत्ता को रेखांकित करता है। दोनों देशों ने व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।

• म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों से संचालित हो रहे साइबर ठगी के गिरोहों के खिलाफ भारत की कड़ी चेतावनी • 18 महीनों में 2,411 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी, लगभग 150 अभी भी फंसे, वापसी के प्रयास जारी • साइबर ठगी के पीड़ितों को तीसरे देशों से तस्करी कर लाया जाता है, क्षेत्रीय सहयोग की तत्काल आवश्यकता • व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (Rare Earths) में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति : भारत ने म्यांमार से संचालित हो रहे साइबर धोखाधड़ी के गिरोहों के बढ़ते खतरे पर म्यांमार के साथ अपनी द्विपक्षीय वार्ता में कड़ा रुख अपनाया है। नई दिल्ली में हुई उच्च-स्तरीय बैठकों के दौरान, भारत ने इस गंभीर मुद्दे से निपटने के लिए तत्काल और मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक विशेष ब्रीफिंग में इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि भारत और म्यांमार संयुक्त रूप से इन साइबर ठगी के ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, जो विशेष रूप से म्यांमार के दक्षिण-पूर्वी सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय हैं। इन संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप, पिछले 18 महीनों में 2,411 भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक उनके वतन वापस लाया गया है। विदेश सचिव ने यह भी बताया कि वर्तमान में लगभग 150 भारतीय नागरिक अभी भी ऐसे ठिकानों पर फंसे हुए हैं। भारत सरकार म्यांमार सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और इन शेष नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कई भारतीय नागरिकों को तीसरे देशों के माध्यम से म्यांमार में तस्करी कर लाया जाता है। यह तथ्य द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ एक व्यापक क्षेत्रीय सहयोग ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करता है, ताकि इस मानव तस्करी और धोखाधड़ी के जाल को तोड़ा जा सके। यह साइबर ठगी का मुद्दा दोनों देशों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में उठाए गए कई महत्वपूर्ण विषयों में से एक था। दोनों पक्षों ने इस बैठक को अत्यंत 'उत्पादक' और 'सकारात्मक' बताया। वार्ता का मुख्य उद्देश्य शांति, प्रगति और समृद्धि के साझा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करना था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जयसवाल, ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति हलाइंग ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार को भारत का 'विश्वसनीय पड़ोसी, भरोसेमंद भागीदार और संकट के समय पहला प्रतिक्रियाकर्ता' बताया, जो भारत की 'पड़ोसी प्रथम', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' नीतियों के अनुरूप है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों, विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (rare earths) में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। विदेश सचिव मिस्री ने बताया कि दोनों देशों की सरकारों ने इन मुद्दों पर संपर्क बनाए रखने और सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों का पता लगाने पर सहमति व्यक्त की है। रक्षा संबंधों के संदर्भ में, भारत का म्यांमार के साथ सहयोग मुख्य रूप से प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संस्थागत मजबूती पर केंद्रित रहा है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों से संबंधित सहायता भी शामिल है। सुरक्षा सहयोग के महत्व को रेखांकित करते हुए, मिस्री ने कहा कि भारत की म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो सीमा प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी समन्वय को दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। म्यांमार के राष्ट्रपति, जो 30 मई से 2 जून तक भारत की चार दिवसीय यात्रा पर थे, ने प्रधानमंत्री मोदी को म्यांमार आने का निमंत्रण भी दिया।

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