ब्रिक्स देशों में पशुधन तकनीक और चारा प्रणाली पर उच्च-स्तरीय संवाद, भारत की अध्यक्षता में संपन्न

• उन्नत पशुधन तकनीक पर ब्रिक्स देशों का मंथन • भारत की अध्यक्षता में सहयोग को मिली नई दिशा • वर्चुअल माध्यम से साझा हुए नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास • टिकाऊ पशुधन विकास पर विशेष जोर ने ब्रिक्स देशों के बीच पशुधन क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक उच्च-स्तरीय संवाद का आयोजन किया। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत, पशुपालन और डेयरी विभाग ने उन्नत पशुधन तकनीक और चारा प्रणाली पर इस वर्चुअल बैठक की मेजबानी की। इसमें सदस्य देशों ने नवाचार, टिकाऊ चारा प्रणाली और पशुधन विकास पर अपने अनुभव साझा किए।
• भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के बीच पशुधन क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयां • उन्नत पशुधन तकनीक और टिकाऊ चारा प्रणाली पर वर्चुअल संवाद का सफल आयोजन • सदस्य देशों ने नवाचार, अनुसंधान और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर जताई सहमति • खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए पशुधन क्षेत्र का विकास आवश्यक • भविष्य में निरंतर सहयोग से टिकाऊ पशुधन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का संकल्प के अनुसार, भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत, पशुपालन और डेयरी विभाग ने 1 जून 2026 को उन्नत पशुधन तकनीक एवं चारा प्रणाली (ALT&FS) पर एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय संवाद का आयोजन किया। यह वर्चुअल बैठक नई दिल्ली स्थित कृषि भवन से आयोजित की गई, जिसने ब्रिक्स देशों के बीच पशुधन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और ज्ञान तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों में लचीले पशुधन क्षेत्रों को मजबूत करना था। गुजरात के आनंद से वर्चुअल माध्यम से अपना स्वागत संबोधन देते हुए, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने पशुधन और डेयरी क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए नवाचार, सहयोग और टिकाऊ चारा प्रणालियों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकें और बेहतर चारा प्रबंधन इस क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार ने अपने उद्घाटन भाषण में खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और समावेशी आर्थिक विकास में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता, तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक सहयोग को टिकाऊ पशुधन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। श्री गंगवार ने कहा कि भारत सरकार इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस उच्च-स्तरीय संवाद में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने पशुधन तकनीक, चारा प्रणाली, पशु पोषण और टिकाऊ पशुधन विकास से संबंधित अपने अनुभवों, सर्वोत्तम अभ्यासों और नवीन दृष्टिकोणों को साझा किया। चर्चाओं के दौरान अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने, पशुधन उत्पादकता में सुधार लाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सदस्य राष्ट्रों में ग्रामीण आजीविका का समर्थन करने जैसे प्रमुख मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने अपनी सफलताओं और चुनौतियों को साझा किया, जिससे अन्य देशों को भी लाभ मिल सके। बैठक के समापन पर, पशुपालन और डेयरी विभाग की अतिरिक्त सचिव (पशुधन एवं डेयरी) सुश्री वर्षा जोशी ने ब्रिक्स देशों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पशुधन तकनीकों, टिकाऊ चारा प्रणालियों, नवाचार और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देने से एक मजबूत और लचीला पशुधन क्षेत्र बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं और अनुसंधान कार्यक्रमों की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। इस उच्च-स्तरीय संवाद ने ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया कि वे पशुधन क्षेत्र के सतत विकास और वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी, नवाचार और सहयोगात्मक साझेदारी का लाभ उठाएंगे।




