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National/State02 Jun 2026, 01:45 pm

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 37 हुई, पांच नए न्यायधीशों ने ली शपथ

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 37 हुई, पांच नए न्यायधीशों ने ली शपथ

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ जजों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने उन्हें शपथ दिलाई। यह वृद्धि 93,000 से अधिक लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के उद्देश्य से की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एस. मोहन की नियुक्ति से महिला प्रतिनिधित्व बढ़ा है। • पांच नए जजों ने ली शपथ • लंबित मामलों के निपटारे में तेजी की उम्मीद • महिला प्रतिनिधित्व में वृद्धि • जजों की कुल संख्या 37 हुई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 37 हो गई है, जो कि स्वीकृत क्षमता से केवल एक कम है। यह विस्तार लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने और संवैधानिक पीठों को नियमित रूप से बुलाने के लिए महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जो स्वीकृत क्षमता से मात्र एक सीट खाली है। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने पांच नए न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह महत्वपूर्ण विस्तार देश की शीर्ष अदालत में लंबित 93,000 से अधिक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करने तथा संवैधानिक पीठों के नियमित गठन को सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

• पांच नए न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण से सुप्रीम कोर्ट की कार्य क्षमता बढ़ी, जजों की संख्या 37 हुई • लंबित मामलों के विशाल बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने का लक्ष्य • वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एस. मोहन की नियुक्ति से महिला प्रतिनिधित्व में उल्लेखनीय वृद्धि, बार से सीधा प्रवेश • संवैधानिक पीठों के नियमित गठन और जटिल मामलों की सुनवाई में मिलेगी सुगमता, न्यायिक प्रशासन को मिलेगा संबल

ने बताया कि भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 कर दिया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 के तहत लिया गया है, जो 16 मई, 2026 को प्रख्यापित किया गया था। इस विस्तार से अदालत को न केवल लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह जटिल संवैधानिक मुद्दों पर सुनवाई के लिए आवश्यक संवैधानिक पीठों को नियमित रूप से गठित करने में भी सहायक होगा।

नियुक्त पांच नए न्यायाधीशों में जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्राशेखर, जस्टिस संजीव सच्चदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एस. मोहन शामिल हैं। जस्टिस शील नागू पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं, जबकि जस्टिस श्री चंद्राशेखर बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। जस्टिस संजीव सच्चदेवा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं और जस्टिस अरुण पल्ली जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एस. मोहन की नियुक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वह बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली दूसरी महिला न्यायाधीश हैं, जो न्यायपालिका में लैंगिक विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह नियुक्ति 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिन्होंने बार से सीधे नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया था।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ से परामर्श के बाद संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत इन न्यायाधीशों की नियुक्ति की है। यह नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से की गई है, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ कर रहे हैं।

इन नियुक्तियों से सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कमी को पूरा करने और न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने की उम्मीद है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक कई न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति निर्धारित है, जिनमें जस्टिस पंकज मित्तल, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल हैं। इन नियुक्तियों से बेंच की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी, खासकर मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के फरवरी 2027 में सेवानिवृत्त होने तक।

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